Saturday, April 18, 2009

कृपया पत्रकार गण से निवेदन है की जूते- चप्पल बाहर उतार कर प्रवेश करे

शाना जूता कुछ नही कहता
पड़ते फ़िर क्यों हो हल्ला होता

चलिए आप तो जानते ही है किस तरह कुछ दिनों से जूता फेकने का कुछ नया चलन चल गया है । इसकी शुरुवात कुछ समय पहले हुई जब बुश पर एक जूता फेका गया ...............
बेचारे सैम अंकल - जब इराक पर कब्जा किया था तब जब सद्दाम हुसैन की मूर्ति को लोग जूते मार कर गिरा रहे थे तब हमारे सैम अंकल ने कहा था की जूते का नम्बर १० था । वह बुश साहब क्या अपने गौर किया की जो जूता आपके ऊपर पड़ा था उसका नम्बर क्या था ?? तब तो आप इसे भागे जैसे किसी कुत्ते को आपके पीछे छु करवा दिया हो ।
ये तो बात थी हमारे सैम अंकल की। उसके बाद तो मानो जूते फेकने का कोई फैशन शुरू हो गया हो ....... कई लोग तो जूतों की बढ़िया क्वालिटी के लिए दुकानों पर दर-दर भटकते दिखाई दिए की कही से ऐसा जूता तो मिले जो किसी न किसी के नाक तोड़ सके ।
बुश के बाद बरी आई चाइना के प्राइम मिनिस्टर की जिन पर लन्दन में जूता फेका गया । बेचारे कर भी क्या सकते थे उनके देश में किसी ने फेका होता तो बिचारा किसी कोठरी में पड़े पड़े अपने अन्तिम दिन गिन रहा होता ..............
उसके बाद कुछ छुट पुट घटनाये होती रही लेकिन भारत ने भी सोचा चलो हम भी शुरू हो जाए पर मरे किसको ...........
तभी कांग्रेस ने एक बहुत बड़ी गलती कर दी अपने को सबसे बड़ी सेकुलर पार्टी कहने वाली कांग्रेस के मुह पर तब तमाचा पड़ा जब उसने १९८४ में सिक्ख दंगे भड़काने वाले टाईटलर को ही लोकसभा टिकिट दे दिया ये कहा का इंसाफ है????
अपने वोट बैंक टाईट करने के लिए आपको क्या टाईटलर ही मिला क्या ????????//
फ़िर होना क्या था एक हमारा सिक्ख भाई भावनाओ में बह गया ओर उठाया मस्त जूता ओर दे मारा चिदंबरम पर
और कांग्रेस तो ठहरी उदारवादी उसने तो माफ़ भी कर दिया । हां हां माफ़ क्यों नही करोगे इतनी बड़ी गलती जो आपने की है उसके सामने तो येछोटी ही बात है ।
में भी सोचने लगा में किसको मारू???? अरे पर क्या जूता मरने से ये कौन सी हमारी मांगे मांग लेंगे ।
में भी अपनी एक लिस्ट तैयार करने में लगा हूँ । क्युकी मौका देख के चौका तो हम भी मर सकते है न
अब ये पोलितिशन बाज़ तो आने से रहे ओर भारत में तो जूता मरना कोई इतनी बड़ी बात भी नही है किसी भी गईमें चले जाओ कोई न कोई पीड़ित पति अपने पत्नी कोई जूते से पीटता ही मिलेगा ।
अब ये सरकार देश में बेरोज़गारी दूर करने से तो रही तो अगर हर बेरोजगार व्यक्ति एक एक जूता भी मरने लगा तो एक जूतों का कारखाना लगाया जन सकता है ।
खैर इन सबकों से भी अगर सरकार ने कुछ सिखा तो वो ये नही की देश का कुछ भला करे सीखा की देश में जूते के कारखानों का पता लगाया जाए ओर कड़क कुँलिटी का जूता बनने वालो पर रोक लगा दी जाए ।
अरे आप कितने लोगो कोई जूते मरने से रोकोगे अगर देश की जनता एक जुट हो गई न दिन भर जूते ही खाते नज़र आओगे ...........
खैर अगर कोई नेता इसे पड़े तो माफ़ी चाहूँगा भइया नही तो कही हमे घर से उठवा लिया तो हमे तो नेताओ से बड़ा डर लगता है भइया ..................... में तो छोटा सा नन्हा सा बच्चा हु मुझे कुछ करना मत ...................
चलो अगर जिन्दा रहे तो फ़िर मिलेंगे नही तो हरिद्वार में मिलेगे ।
लेकिन आप तो लिखते ही रहना इस देश में होने वाले हर ग़लत काम के खिलाफ .................

हा पर आचे क्वालिटी के जूते खरीदना मत भूलियेगा

वंदे मातरम

1 comment:

nandini said...

politition ka gyan tustus ke bare hai apke andar...agle neta ap ban jaiye...hum jaise janta ki asha hai..satyarth neta ko neta ban kar dekhne ki...humari mang puri ho..agle neta ap ho...