Friday, September 4, 2009

भारतीय जिन्ना पार्टी

जसवंत और जिन्ना ...
इस समय दिल्ली में जेरे बह्स है ये मुद्दा ............
काफी दिनों से भारतीय राजनीती में चल रही हल - चल जिससे मेक्डोनाल्ड ओर पिज्जा हट के बर्गर खाने वाली जनजातीय तो बेखबर है , परन्तु मेरे जैसा शुद्ध दल - रोटी खाने वाला आदमी इस बहस से कैसे दूर रह सकता है | तो कहानी की शुरुवात यहाँ से होती है की अपनी सेना ( भारतीय जनता पार्टी ) के हनुमान जसवंत सिंह अचानक से रावण बन जाते है , इसकी शुरुवात होती ख़ुद की लिखी अपनी एक अनोखी रामायण जिसका आधुनिक नाम है - भारत विभाजन जिन्ना के आईने में ................. से हुई है |
वैसे तो ये भारत विभाजन का मामला बड़ा पेचीदा है इस विषय पर बरसो से कई बड़े बड़े इतिहासकार अपना सर फोड़ते आ रहें है फ़िर भी जसवंत सिंह ने सोचा चलो में भी एक बार इस महान कृत्य में अपना सर फुडवा कर देखू , पर वो भूल गए की जो गलती आडवानी ने पाकिस्तान में जिन्ना की कब्र पे फूल चढाते समय की थी उससे दूसरी बार में दोहरा कर क्या हासिल होगा?.......मुस्लिमो के चंद वोट ??? ये हिन्दुत्व के आटे में बनाई गई रोटी है इतनी जल्दी नही पकने वाली ............. जसवंत साहेब ।
वैसे तो जसवंत सिंह काफी काबिल नेता उनकी काबिलियत पे शक करना तो अपने मुह पर कीचड़ उछालने जैसा होगा ... उनकी काबिलियत से ही बीजेपी को पश्चिम बंगाल में एक लोकसभा सीट मिली है वरना बंगाल में सीट लाना कोई मजाक है भला|
फ़िर भी उनकी काबिलियत पे शक करके उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया .... खैर काम ही ऐसा किया था ना। एक तो पार्टी अपना एजेंडा ही हिन्दुत्व हो जो आर. एस. एस जैसे हिंदू पार्टी का हिंदू राष्ट्र का सपना हो उसमे ऍसी छिछोरी हरकते भला कौन बर्दाश्त करे???
खैर दिन पे दिन अपनी इज्ज़त गवाती जा रही बीजेपी के लिए तो एक झटका ही है जो पार्टी पिछले कुछ सालो से मजबूत थी अब उसमे फ़ुट पड़ती जा रही है । दिन पे दिन कोई नया सुरमा आकर पार्टी के नेत्रत्व का दावा करने लगता है । ऊपर से जसवंत ने भी झटका दे लिया पार्टी नेताओ के लाख मन करने के बाद भी अपनी पुस्तक का विमोचन कर डाला। फ़िर होना क्या चुप चाप बिना जसवंत सिंह को कोई नोटिस दिए उन्हें पार्टी से निष्कासित करदिया गया। अब बिचारे इधर उधर घूम कर अपना हक मांग रहें है गुजरात जैसे राज्यों में तो उनकी पुस्तक पर बैन लगा दिया गया ...
वैसे कुछ पार्टी परस्त लोग इस बात से खासे चिडे नज़र आ रहें है की उनके चेले जसवंत सिंह को सिर्फ़ इसलिए निकल दिया की उन्नोने पार्टी की सोच से अलग अपनी सोच का एक छोटा सा नमूना पेश किया । खैर ये भारतीय जनता पार्टी में पिछले कुछ दिनों से जो जिन्ना विवाद चल रहा है उससे इन्हे भारतीय जिन्ना पार्टी कहने में कोई आतिशयोक्ति नही होगी । क्युकी जिन्ना का जिन् अपने चिराग से निकल कर बीजेपी ओर आर एस एस के नेताओ की छातियों पर लोट रहा है । कहने को ये सब आर एस एस का कियाधरा है पर बेचारे हमेशा की तरह मानने को तैयार ही नही है, खुल्ले आम मीटिंगे कर के सबको आश्चर्य चकित कर रहें है ।
खैर बेचारे जसवंत सिंह अपने ही देश में शरणार्थी बने है ओर पाकिस्तान के प्रार्थी बने है, और जा रहें है अपनी पार्टी के नेताओ की ............. पे लात देकत पाकिस्तान अपनी पुस्तक का विमोचन करने । अब करे भी तो क्या करे फ्री जो हो गए है तो चले कायदे आज़म का नाम रोशन करने ।
जिन्ना ने १९४७ के अपने एक भाषण में कहा था की आज से कई सालो बाद आप सब मुझे याद करोगे ....
हलाकि ये नही कहा था की इस तरह..................
खैर वो तो हम मज़बूरी में कर ही रहें है । जसवंत भइया की कृपा से .......
वैसे इतिहासकारों का कहना है की किताब में कोई नई बात नही है, फ़िर भी किताब तो बिकेगी कांड ही ऐसा हुआ है। खैर तो अब देखना होगा की ये भारतीय जिन्ना पार्टी अ..अ... मेरे कहने का मतलब है भारतीय जनता पार्टी कब तक जिन्ना का मुद्दा गरमाए रख पाती है ओर ये बीजेपी कब तक पूरी तरह से बिखरने में कामयाब हो पाती है , दिन पे दिन बिखरता विपक्ष देश की राजनीति के लिए खतरा हो सकता है , ये बात तो मनमोहन सिंह ने भी की लेकिन उनकी बीजेपी सुने कहाँ इसलिए में भी एक बार कह देता हू......
ऐसा न ही की कही जिन्ना के जिन् को चिराग से जबरदस्ती घिस कर निकलने की मशक्कत में कही बीजेपी में बिखराव नही पैदा होजाए जो बाद में एक गहरी खाई बन के उभरे ।
धीरे धीरे पार्टी अपने बड़े नेताओ का विश्वास खोटी ही जा रही है ओर दूसरी षेत्रीय पार्टिया इसका लाभ जरुर उठाना चाहेगी ... कही जसवंत सिंह दुसरे कल्याण सिंह बन कर न उभर जाए ।
भइया राजनीती में तो कुछ भी सम्भव है ............................
तो अंत में एक ही बात कहना चाहूँगा की .............
खेल भाई खेल राजनीती का खेल
कैसा गज़ब ये राजनीती का खेल
अरे शोरगुल जितना हो कानो में तेल
खेल भाई खेल राजनीती का खेल..............

2 comments:

MANISH said...

bhut satik or saral sabdo ka istemal h or subject k hissab se bhasa ka use kiya h....great yaar.....god bless u.
jonayi ramayan apne likhi h vo kabile tarif h.. keep it up

kabad khana said...

bjp ek aise andhe kunve me gum hoti ja rahi he jahan use naye khun aur nai soch ki jaroorat ki jaroorat he.par thake aur budhe hath satta se aise chipke huve hain ki chhodne ko tayyar nahi hain.yadi kisi gaddhe me pani bhara rahe to usme keede pad jate hain tab pani badalna padta he.par bjp ke liye aisa koi gomukh najar nahi aa raha jisse nai gangotri nikal sake .kaise kaise manzar samne ane lage hain gate gate log chillane lage hain ab to is talab ka pani badal do ye kanwal ke phool ab kumhlane lage hain.