Tuesday, September 8, 2009

मकसद ??

आखिर ये मकसद है क्या ?? ये किस चिडिया का नाम है ? वैसे कई जाने माने लोग जिनकी बातें हमे मजबूरी में मानना पड़ती है क्युकी वो जाने माने लोग होते है, उनका कहना है की मकसद वो चीज़ है जो हर किसी के जीवन में एक होता है हालाकि ये लोग जाने माने कब बने ये तो एक कठिन प्रश्न है जिसका उत्तर हर बच्चा जानना चाहता है जब वो अपनी बाल्यावस्था में होता है ..............
खैर जहाँ तक मेने मकसद को समझा है ओर महसूस किया है वो ये है की किसी के भी जीवन में एक मकसद नही होता है ....... हर क्षण हमारे जीवन में मकसदों की संख्या बढती ही जाती है ........... उदाहरण के तौर पर जब एक कुत्ता पैदा होता है तो सबसे पहले रोटी के लिए संघर्ष करता है फ़िर जब वो बड़ा होता है तो अपने क्षेत्र में अपना वर्चस्व स्थापित करने के लिए संघर्ष करता है , लघुशंका जाने के लिए कही से भी कोई गाड़ी जुगाड़ने के लिए संघर्ष में रहता है उसके बाद जब वो ज्यादा अपना कुत्ता धर्म निभाने की कोशिश करता है तो लोगो के द्वारा उससे इतनी लाठिया पड़ती है की उसका मकसद वीरगति को प्राप्त कर चुका होता है ।
खैर ये तो बात हुई कुत्तो की पर हम तो एको महान प्रजाति इंसान की बात करते है इन कुत्तो में में हम क्यो अपना समय बरबाद करे तो बात करते है इंसान की जब एक छोटा सा बच्चा पैदा होता है तो वह उसका मकसद होता है उससे कैसे भी करके अपने लिए दूध का मकसद पूरा करना फ़िर जैसे जैसे वो बड़ा होता है उसके मकसदों की संख्या भी बढती जाती है । थोड़ा बड़ा होता है तो उसे अपने टीवी देखने के मकसद को पूरा करना होता है । जब वो बड़ा होता है तो पाठशाला में अपने पड़ने के मकसद को पूरा करता है । लेकिन जब कॉलेज में पहुचता है तो वो कॉलेज में ३ साल गुजरने के लिए एक मकसद धुन्धता है मतलब की एक गर्ल फ्रेंड की तलाश करता है । एक भक्त रोज़ हनुमान चालीसा का पाठ करता है ओर यही उसका मकसद है ब्रम्हचर्य हलाकि कुछ भक्त ये मकसद केवल मंगलवार को ही निभाते नज़र आते है ओर बाकि समय लड़किया छेड़ते हुए दुसरे मकसद पूरा करते है । कुछ अपना मकसद अपने सपनो में खोजते है जो की कभी पूरा होता दिखाई नही देता है क्युकी हमेह्सा कोई न कोई उन्हें नींद में से लात मार के उठाता ही है ओर फ़िर हम उससे गलिया देने के अपने मकसद को पूरा करते है । कई लोग लव मेरिज को अपना मकसद समझते है ओअर प्यार को जिंदगी का एक मात्र मकसद ओर निकल पड़ते है अपनी फटफटी पर लड़कियों को छेड़ने ओर फ़िर मोहोल्ले वाले उन्हें पीट कर अपना मकसद पूरा करते है ।
खैर ये मकसद को समझने के लिए तो बहुत महनत करनी पड़ेगी । क्युकी मुझे ही अभी तक मेरा मकसद का पता नही चला वैसे एक तो ये मकसद बड़ी अच्छी चीज़ है कम से कम हम कुछ करते तो है चाहे चोरी ही कर क्युकी चोर की लिए तो वेअही मकसद है न उसके जीने का वैसे हर किसी का एक न एक मकसद होता है मेरा भी मुझे जब पता चल जाएगा तो आपको जरुर बताऊंगा ।

हजारो मकसद ऐसे की हर मकसद पे दम निकले
बहुत निकले मेरे मकसद लेकिन फ़िर भी कम निकले
मकसद में नही है फर्क जीने और मरने का
कही ऐसा न होयहाँ भी वही मकसद सनम निकले

1 comment:

ankit said...

tell me something....why did you come all the way to delhi leaving your hometown and all the comforts behind....why do you want to do mass comm....we all have our reasons...iam sure you do to....we all need a reason, a path to follow in life....there my friend comes 'maksad'....ambitions and aspirations make our life spontanous and dynamic....all i can say is that you know your maksad in life and thats the reason why you are here.....p.s: next tine i'll write it hindi